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शुद्धाद्वैत मत के प्रणेता वल्लभाचार्य हैं।
इसके अनुसार सच्चिदानंद ब्रह्म के तीन रुप हैं - पूर्ण पुरुषोत्तम रस अर्थात अभेद रुप परब्रह्म श्री कृष्ण, अक्षर ब्रह्म जिनके दो स्वरुप हैं, तथा अन्तर्यामी।

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