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वैज्ञानिकों के अनुसार लहसुन को जब चबाया जाता है, तो लहसुन में उपस्थित एलीनिन नामक तत्व चित्त को प्रफुल्लित करता है। ऐसा लहसुन की तीक्ष्णता के कारण भी होता है। आहार-विशेषज्ञ यह मानते हैं कि हमें नॉन-एथरोजीनिक आहार का सेवन करना चाहिए, जिसके अंतर्गत फल-तरकारियां, गिरीदार- फल, कंद मूल एवं शाकाहार का समावेश किया गया है। श्रीमद्भगवद् गीता में ऐसे आहार सात्विक लोगों के लिए निर्देशित किए गए हैं।