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मानव के अन्दर तीन गुणों - सत्व, रज, तथा तम के मिश्रण के परिणाम स्वरुप उत्पन्न गुण को मानव प्रकृत्ति कहा जाता है। मानव के समस्त हाव-भाव इसी मानव गुणों के प्रकटीकरण हैं। ये भाव चित्त में उत्पन्न होते हैं तथा उसके बाद सम्पूर्ण मानव व्यवहार पर उसके प्रभाव पड़ते हैं, जिनमें मानव के खान-पान, रहन-सहन, बात-व्यवहार, तथा सोच-विचार प्रभावित होता है।
कुल मिलाकर मानव प्रकृत्ति का आधार चित्त या अन्तःकरण ही है।

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