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मध्वाचार्य

मध्वाचार्य (1199-1303) दक्षिण भारत के एक सन्त थे जिन्होंने द्वैतवाद का सिद्धान्त दिया। उनके अनुसार द्वैतवाद पारम्परिक सिद्धान्त रहा है।
उनका जन्म तुलुबदेश के बेलिग्राम में उदीपि के पास मधिजीभट्ट नामक एक वेद-वेदांग पारंगत ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके घर का नाम वासुदेव था। दौड़ने, कूदने-फांदने, कुश्ती लड़ने आदि मेें पारंगत होने के कारण उन्हें भीम नाम से भी पुकारा जाता था।

उनके बारे में मान्यता है कि 11 वर्ष की आयु में उन्होंने अद्वैत मत के संन्यासी अच्युतपक्षाचार्य से संन्यास की दीक्षा ले ली थी। उसके बाद उनका नाम पूर्णप्रज्ञ रखा गया था। वेदान्त में पारंगत होने पर उनके गुरु ने उनका नाम आनन्दतीर्थ रखा। उपनिषदों के भाष्य, गीताभाष्य, ब्रह्मसूत्र का भाष्य आदि अनेक ग्रंथों की रचना उन्होंने इसी नाम से की।