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बिम्बवाद

बिम्बवाद अंग्रेजी साहित्य का एक मत है जिसने 1910 से 1918 के बीच एक आन्दोलन का स्वरूप ग्रहण कर लिया था। अंग्रेजी में इसे इमेजिज्म कहते हैं तथा हिन्दी में कई विद्वान इसे प्रतीकवाद कहते हैं। यह मुख्यतः काव्य सम्बंधित आन्दोलन रहा जिसमें प्रतीकों का भरपूर उपयोग करते हुए बातें कही जाती थीं। यह आन्दोलन अमेरिका तथा इंगलैंड में मुख्य रूप से प्रभावी था।

प्रसिद्ध अमेरिकी कवि एजरा पाउंड ने सबसे पहले इमेजिज्म शब्द का प्रयोग किया। टी ई हुल्म का दर्शन इस आन्दोलन के सिद्धान्तों का आधार था। हुल्म कविता के रोमांटिक दृष्टिकोण के घोर विरोधी थे तथा उन्होंने उसपर तीखी टिप्पणियां की थीं।

एजरा पाउंड ने आन्दोलन को आगे बढ़ाते हुए 1914 में इंगलैंड से प्रतीकवादी कविताओं का एक काव्य संग्रह प्रकाशित किया। बाद में तो अमेरिका तथा इंगलैंड में इस प्रकार के कई कविता संग्रह प्रकाशित हुए।

इस आन्दोलन के छह प्रमुख सिद्धान्त थे -

1. सामान्य भाषा, जो अत्यधिक अलंकार और अतिरंजना से दूर हो, का शुद्ध तथा सही प्रयोग हो
2. छन्दों तथा लयों का उपयोग नये चमत्कारों के साथ हो
3. विषयों में विविधता हो तथा उनके चयन की स्वतंत्रता हो
4. प्रतीकों का बंधनमुक्त उपयोग हो
5. प्रभाव में कविताएं स्पष्ट तथा शक्तिशाली हों, तथा
6. प्रभाव केन्द्रित करने के लिए भावों की सघनता से प्रवाह की व्यापकता को सीमित कर दिया जाये

इस कविता आन्दोलन से बाद में एजरा पाउंड अलग हो गये थे। टी एस इलियट भी कुछ समय तक इस आन्दोलन से जुड़े रहे थे।


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