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निम्बार्क

निम्बार्क (11वीं शताब्दी) द्वैताद्वैतवाद के प्रवर्तक संत थे। उनका जन्म रामानुज के परवर्ती काल में हुआ था। वह तेलंग ब्राह्मण थे।

उनके प्रमुख ग्रंथ हैं - वेदान्तपारिजात (ब्रह्मसूत्र का भाष्य), दशश्लोकी, तथा श्रीकृष्णस्तवराज।

वह राध-कृष्ण के भक्त थे। वे द्वैत तथा अद्वैत सिद्धान्तों के सबसे बड़े समन्वयकों में माने जाते हैं।