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भारतीय परम्परा में वैवाहिक सम्बंधों के लिए सम्पूर्ण शुभाशुभ विचार 12 प्रकार से किया जाता है, जिसे द्वादशकूट विचार कहा जाता है। परन्तु अधिकांश मामलों में केवल अष्टकूट विचार ही किया जाता है। यह इसलिए क्योंकि ये आठ कूट या गुण ही प्रमुख हैं। शेष चार नृदूर, युन्जा, वर्ग विचार एवं तत्व विचार कर मिलान करना भी उपयोगी होता है जो आवश्यकता पड़ने पर मिलाया जाता है।

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