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देह

देह का सामान्य अर्थ है शरीर। परन्तु कवीरपंथी साहित्य में देह शब्द का प्रयोग दार्शनिक तथा आध्यात्मिक रूप से किया गया है – शरीर के अर्थ में भी तथा विशेष अर्थ में भी।
इसमें छह देह बताये गये हैं – स्थूल देह, सूक्ष्म देह, कारण देह, महाकारण देह, कैवल्य देह, तथा हंस देह।
स्थूल देह की संरचना 25 तत्वों, 10 इन्द्रियों (पांच ज्ञानेन्द्रिय तथा पांच कर्मेन्द्रिय), पांच प्राणों, चार अन्तःकरणों, तथा जीव से हुई है। यह देह की जाग्रत अवस्था है।
पांच प्राणों, दस इन्द्रियों, मन, तथा बुद्धि के योग से सूक्ष्म देह बना है। यह स्वप्न की अवस्था है।
चित्त, अहंकार, तथा जीव के योग से कारण देह बना। इसकी अवस्था सुषुप्ति है।
अहंकार और जीव के योग से महाकारण देह बना। यह तुरीया अवस्था में है।
जीवात्मा से कैवल्य देह बना है। इसकी अवस्था तुरीयातीत है।
हंस देह जीव का विशुद्ध चैतन्य स्वरूप है। इसमें कोई तत्व नहीं है। यह तत्वातीत है। इसे प्राप्त करना ही जीवन का ध्येय है।