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देव

जो दिव्य गुणों से युक्त हों उन्हें देव या देवता कहते हैं।

शतपथ ब्राह्मण ने तेंतीस देव बताये हैं। ये हैं - आठ वसु, ग्यारह रूद्र, बारह आदित्य, इन्द्र तथा प्रजापति

सृष्टि के वास स्थान होने के दिव्य गुण के कारण वसु, शरीर को छोड़ने पर जो रोदन कराते हैं वे रूद्र, तथा सबकी आयु को जो ले जाते हैं वे आदित्य कहे जाते हैं। इन्द्र परम ऐश्वर्य को कहते हैं जो आकाश में बिजली के रूप में प्रकट होते हैं। प्रजापति यज्ञ को कहा जाता है।

आठ वसुओं के नाम हैं - पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश, चन्द्रमा, सूर्य, तथा नक्षत्र।
ग्यारह रुद्रों के नाम हैं - प्राण, अपान, व्यान, उदान, समान, नाग, कूर्म्म, कृकल, देवदत्त, धनंजय, तथा जीवात्मा।
बारह आदित्य संवत्सर के बारह महीनों के स्वामी हैं।



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