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दूतीकर्म

दूती नायिका के कर्म के दूतीकर्म कहा जाता है। दूतीकर्म के दो भेद सामान्यतः स्वीकार किये जाते हैं। ये हैं – संघट्टन तथा विरह निवेदन। नायक-नायिका को मिलाना संघट्टन है, तथा विरह का वर्णन कर नायक-नायिका को मिलाने का प्रयत्न करना विरह-निवेदन।

कृपाराम ने मर्मग्रहण (दिल की बात जानना), संगदेन (साथ-साथ रहना), तथा प्रतिज्ञा (मिलाने की प्रतिज्ञा करना) जैसे कर्म भी बताये हैं। स्तुति, विनय, प्रबोध, तथा निन्दा को भी दूतीकर्म में शामिल किया जाता है।