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तामसिक मानव प्रकृति के तीन गुणों में से एक है। अन्य दो हैं - राजसिक और सात्विक। तामसिक शब्द तम से निकला है जिसका अर्थ है अन्धकार। अर्थात् वह व्यक्ति जो अन्धकार में अपनी जीवन यात्रा कर रहा है वह तामसिक है। इनकी यात्रा अन्धकार से प्रारम्भ होकर अन्धकार तक ही जाती है। ऐसे व्यक्ति अन्धकार की यात्रा करते हुए इसलिए माने जाते हैं क्योंकि वे अज्ञानी होते हैं तथा उन्हें नहीं मालूम कि अच्छा क्या है तथा बुरा क्या। अन्धकार अज्ञान का ही द्योतक है। ऐसे व्यक्ति की मुक्ति की कोई संभावना नहीं होती। ये अज्ञान में ही अच्छे और बुरे कार्य करते रहते हैं।

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