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जैश-ए-मोहम्मद एक चरमपंथी इस्लामी संगठन है जो भारत में आतंकवाद की अनेक घटनाओं के लिए जिम्मेदार रहा है। भारत के अनेक बार अनुरोध करने के बावजूद अमेरिका ने तब तक जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तय्यबा को आतंकवादी संगठनों की सूची से बाहर रखा जब तक कि यह खतरा स्वयं अमेरिका के लिए दरपेश नहीं हो गया।

कश्मीर घाटी में सक्रिय चरमपंथी संगठनों में जैश-ए-मोहम्मद सबसे नया है। इसकी स्थापना फ़रवरी 2000 में की गयी थी। इस संगठन का मुखिया मौलाना मसूद अज़हर है जिसे दिसंबर 1999 में इंडियन एयरलाइंस के अपहरण के बाद भारत सरकार ने दो दूसरे चरमपंथियों के साथ रिहा कर दिया था।

इस संगठन में हरकत-उल-मुजाहिदीन और हरकत-उल-अंसार के कई चरमपंथी भी शामिल हैं। खुद मौलाना मसूद अज़हर हरकत-उल-अंसार का महासचिव रह चुका है और उसके हरकत-उल-मुजाहिदीन से भी संपर्क रहे हैं। उसे 1994 में श्रीनगर में गिरफ़्तार किया गया था।

लेकिन 1999 में अफ़ग़ानिस्तान के कंधार में उसकी रिहाई के बाद वो पाकिस्तान में नज़र आया। तभी से उसने मृतप्राय: हरकत-उल-अंसार में जान फूंकने की कोशिश की।

हालांकि पाकिस्तान में रहकर मौलाना मसूद अज़हर के अपने संगठन जैश-ए-मोहम्मद के गतिविधियां चलाने से अंतरराष्ट्रीय समुदाय में पाकिस्तान को शर्मिंदगी उठानी पड़ी है क्योंकि विमान अपहरण की घटना से मौलाना अज़हर पहले से ही काफ़ी सुर्ख़ियों में आ गया था।


जैश-ए-मोहम्मद के चरमपंथियों के लिए आत्मघाती हमला पसंदीदा तरीक़ा है। मौलाना मसूद अज़हर कट्टरपंथी विचारों वाले ऑडियो कैसेट कश्मीर घाटी में भेज कर युवा वर्ग को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश करता है।

इस संगठन की स्थापना का मुख्य उद्देश्य कश्मीर घाटी में हिंसा की घटनाओं में बढ़ोत्तरी करना है।