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सिद्ध सिद्धान्त के अनुसार चैतन्य अन्तःकरण का एक स्वरुप है।
चैतन्य के धर्म हैं - विमर्ष, हर्ष, धैर्य, चिन्तन तथा निःस्पृहा।

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