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चन्द्रगिरि या चन्द्रद्वीप

चन्द्रगिरि या चन्द्रद्वीप भारत का एक प्राचीन स्थल था जिसका वर्णन मत्स्येन्द्रनाथ तथा गोरखनाथ की कथाओं में मिलता है। हजारी प्रसाद द्विवेदी का मानना है कि 'चन्द्रगिरि कामरूप से बहुत दूर नहीं था और या तो बंगाल के समुद्री किनारे पर कहीं था, या जैसा कि तिब्बती परम्परा से स्पष्ट है, ब्रह्मपुत्र से घिरे हुए किसी द्वीपाकार भूमि पर अवस्थित था। इतना निश्चित है कि वह स्थान पूर्वी भारतवर्ष में कामरूप के पास कहीं था।'

एक अनुमान यह भी है कि यह सुन्दरवन, जो कलकत्ता से दक्षिण में स्थित है, का ही ध्वनि परिवर्तित रूप है। सम्भव है सुन्दर शब्द के बदले में चन्द्र (जो सुन्दरता का पर्याय है) शब्द का प्रयोग किया गया हो।

एक कथा में कहा गया है कि गोदावरी गंगा के समीप स्थित चन्द्रगिरि नामक स्थान के एक सुराज नामक ब्राह्मण की पुत्राभिलाषी पत्नी सरस्वती को मत्स्येन्द्रनाथ ने भभूत दी थी, जिसको खाने के फलस्वरूप उसने गोरखनाथ को पुत्र के रूप में जन्म दिया था। यह कथा योगिसम्प्रदायविष्कृति के तीसरे अध्याय में है।


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