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गुलाम राजवंश

इस्‍लाम में समानता की संकल्‍पना और मुस्लिम परम्‍पराएं दक्षिण एशिया के इतिहास में अपने चरम बिन्‍दु पर पहुंच गई, जब गुलामों ने सुल्‍तान का दर्जा हासिल किया। गुलाम राजवंश ने लगभग 84 वर्षों तक इस उप महाद्वीप पर शासन किया। यह प्रथम मुस्लिम राजवंश था जिसने भारत पर शासन किया। मोहम्‍मद गोरी का एक गुलाम कुतुब उद दीन ऐबक अपने मालिक की मृत्‍यु के बाद शासक बना और गुलाम राजवंश की स्‍थापना की। वह एक महान निर्माता था जिसने दिल्‍ली में कुतुब मीनार के नाम से विख्‍यात आश्‍चर्यजनक 238 फीट ऊंचे पत्‍थर के स्‍तंभ का निर्माण कराया।

गुलाम राजवंश का अगला महत्‍वपूर्ण राजा शम्‍स उद दीन इलतुतमश था, जो कुतुब उद दीन ऐबक का गुलाम था। इलतुतमश ने 1211 से 1236 के बीच लगभग 26 वर्ष तक राज किया और वह मजबूत आधार पर दिल्‍ली की सल्‍तनत स्‍थापित करने के लिए उत्तरदायी था। इलतुतमश की सक्षम बेटी, रजिया बेगम अपनी और अंतिम मुस्लिम महिला थी जिसने दिल्‍ली के तख्‍त पर राज किया। वह बहादुरी से लड़ी किन्‍तु अंत में पराजित होने पर उसे मार डाला गया।

अंत में इलतुतमश के सबसे छोटे बेटे नसीर उद दीन मेहमूद को 1245 में सुल्‍तान बनाया गया। जबकि मेह‍मूद ने लगभग 20 वर्ष तक भारत पर शासन किया। किन्‍तु अपने पूरे कार्यकाल में उसकी मुख्‍य शक्ति उसके प्रधानमंत्री बलबन के हाथों में रही। मेहमूद की मौत होने पर बलबन ने सिंहासन पर कब्‍ज़ा किया और दिल्‍ली पर राज किया। वर्ष 1266 से 1287 तक बलबन ने अपने कार्यकाल में साम्राज्‍य का प्रशासनिक ढांचा सुगठित किया तथा इलतुतमश द्वारा शुरू किए गए कार्यों को पूरा किया।

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Page last modified on Wednesday April 2, 2014 07:14:16 GMT-0000 by hindi.