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खेचरीमुद्रा

खेचरीमुद्रा हठयोग की एक मुद्रा है।

इस मुद्रा में योगी जीभ को उलटकर कपाल कुहर में प्रवेश कराता है तथा सहस्रार पद्म के मूल में स्थित योनि नामक त्रिकोणाकार शक्तिकेन्द्र, जिसे चन्द्रस्थान भी कहा जाता है, से झरने वाले अमृत रस या अमर वारुणी को पीकर अमर हो जाता है। हठयोगी ऐसा ही मानते हैं।

यही कारण है कि योग की सभी मुद्राओं में खेचरी मुद्रा को सर्वाधिक महत्व दिया जाता है।


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