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खजुराहो के स्‍मारक

खजुराहो, प्राचीन खरज्‍जुरावाहक मध्‍य प्रदेश राज्‍य में स्थित है और यह चंदेल शासकों के प्राधिकार का प्रमुख स्‍थान था जिन्‍होंने यहां अनेकों तालाबों, शिल्‍पकला की भव्‍यता और वास्‍तुकलात्‍मक सुंदरता से सजे विशालकाय मंदिर बनवाए।

यशोवरमन (एडी 954) ने विष्‍णु का मंदिर बनवाया जो अब लक्ष्‍मण मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है और यह चंदेल राजाओं की प्रतिष्‍ठा का दावा करने वाले इसके समय के एक उदाहरण के रूप में एक आभूषण के रूप में स्थित है।

खजुराहो के मंदिर अपनी वास्‍तुकलात्‍मक कला के लिए विश्‍वविख्‍यात है और इसे यूनेस्‍को द्वारा विश्‍व विरासत घोषित किया गया है। विश्‍वनाथ, पार्श्‍व नाथ और वैद्य नाथ के मंदिर राजा डांगा के समय से हैं जो यशोवरमन के उत्तरवर्ती थे। जगदम्‍बी चित्र गुप्‍ता खजुराहो के भाव्‍य मंदिरों में पश्चिमी समूह के बीच उल्‍लेखनीय है। खजुराहो का सबसे बड़ा और महान मंदिर अनश्‍वर कंदारिया महादेव का है जिसे राजा गंडा (एडी 1017 - 29) ने बनवाया है। इसके अलावा कुछ अन्‍य उदाहरण हैं जैसे कि बामन, आदि नाथ, जवारी, चतुर्भुज और दुल्‍हादेव कुछ छोटे किन्‍तु विस्‍तृत रूप से संकल्पित मंदिर हैं। खजुराहो का मंदिर समूह अपनी भव्‍य छतों (जगती) और कार्यात्‍मक रूप से प्रभावी योजनाओं के लिए भी उल्‍लेखनीय है। यहां की शिल्‍पकलाओं में धार्मिक छवियों के अलावा परिवार, पार्श्‍व, अवराणा देवता, दिकपाल और अप्‍सराएं तथा सूर सुंदरियां भी हैं, जो उनकी कोमल और युवा नारीत्‍व के रूप में अपनी अपार सुंदरता के लिए विश्‍व भर में प्रशंसित हैं। यहां वेशभूषा और आभूषण भव्‍यता और मनमोहक हैं।

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