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कुल-अकुल

कौल मार्ग साधना पद्धति में कुल शक्ति को तथा अकुल शिव को कहा जाता है। कुल और अकुल में सम्बंधो की स्थापना करना ही वास्तव में कौलमार्ग कहलाता है।

जहां एक ओर शक्ति को शिव की प्रिया माना गया है वहीं यह भी कहा गया कि शिव तथा शक्ति में कोई भेद नहीं है। वस्तुतः दोनों एक ही हैं। कौल मार्ग में चन्द्रमा और चांदनी में जो सम्बंध है वैसा ही सम्बंध शिव तथा शक्ति में माना गया है। शिव की सिसृक्षा को ही इसमें शक्ति कहा जाता है। शक्ति न तो शिव से भिन्न है और न ही शिव के बिना उसका कोई अस्तित्व ही है।

देवी भागवत में कहा गया कि शक्ति के बिना शिव शव की तरह हैं। उसमें कहा गया कि शिव शब्द से इकार हटा लेने पर शव शब्द ही शेष रहता है। इसलिए इ कार को भी शक्ति कहा गया।


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