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कल्ब

सूफी मत में कल्ब एक उच्चतर आत्मा के तीन विभागों में से एक है। दो अन्य हैं रूह तथा सिर्र। इसे रूह तथा नफ्स के बीच स्थित माना जाता है।

इस मत में कल्ब को ही मनुष्य की बौद्धिक क्रियाओं का आधार माना गया है। यह भौतिक स्थूल जगत तथा आध्यात्मिक जगत के बीच स्थित है।

बुद्धि से इसका योग है। दृश्यमान जगत में परमात्मा विषयक जो ज्ञान अभिव्यक्त होता है उसे यह बाह्य इन्द्रियों द्वारा ग्रहण करता है तथा अन्दर की सूक्ष्म इन्द्रियों को इस ज्ञान से अवगत कराता है।

यही कल्ब मानव की अच्छी तथा बुरी प्रवृत्तियों के बीच का युद्धक्षेत्र है। दोनों प्रवृत्तियां इसी में हमेशा ही युद्धरत रहती हैं। एक ओर तो यह परमात्मा सम्बंधी ज्ञान के लिए खुला रहता है, परन्तु दूसरी ओर वासना तथा इन्द्रिय सुख को भी यह प्रवेश करने देता है।


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