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कबीरा

कबीरा एक प्रकार के निर्गुण लोकगीत हैं जिनमें संत कबीर की छाप मिलती है। अनेक कबीरा वैसे भी हैं जिनमें 'कहत कबीर सुनो भाई साधो' जैसे पद सीधे सम्मिलित कर लिये गये हैं।

कबीरा संत कबीर की रचनाएं नहीं होतीं बल्कि ये अन्य लोगों की रचनाएं हैं जो कबीर की वाणी से प्रभावित हैं।


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