Loading...
 

कथनी

कथनी शब्द कथन से निकला है जिसका अर्थ है केवल कथन मात्र।

संतों ने कथनी को अधिक महत्व नहीं दिया दिया है। उनका कहना है कि व्यक्ति का कल्याण कथनी से नहीं होता बल्कि करनी से होता है।

कबीरदास ने कहा -
कथनी थोथी जगत में करनी उत्तम सार।
कहै कबीर करनी भली उतरैं भौजल पार।।

संत केवल अनुष्ठानमूलक साधना नहीं करते बल्कि उनकी साधना आचरणमूलक ही अधिक होती है। उनका कहना है कि धर्म के सम्बंध में केवल बात करते रहने से कुछ भी कल्याण नहीं होता, बल्कि ऐसी कथनी को करनी में ढाने से ही निःश्रेयस की प्राप्ति संभव हो पाती है। वे इस बात पर बल देते हैं कि लोगों की कथनी और करनी में भेद नहीं होना चाहिए। कथनी और करनी एक न होने पर तो व्यक्ति धोखेबाज बनकर अपना नाश कर लेता है।


Contributors to this page: hindi .
Page last modified on Tuesday August 5, 2014 16:58:16 GMT-0000 by hindi.