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औघड़

औघड़ अघोरपंथ की तीन शाखाओं में से एक शाखा है। दो अन्य शाखाएं हैं सर्वंगी तथा घुरे। परन्तु सामान्य बोलचाल की भाषा में अघोरपंथी साधकों को औघड़ कह दिया जाता है।

चूंकि अघोरपंथ गोरखनाथ ने चलाया था इसलिए औघड़ों को नाथपंथी भी कहा जाता है।

औघड़ जबतक कान फड़वाकर मुद्रा धारण नहीं कर लेते तब तक औघड़ ही रहते हैं। कान फड़वाकर मुद्रा धारण कर लेने के बाद इन्हें कनफटा योगी कहा जाता है।

औघड़ भक्ष्याभक्ष्य का विचार नहीं रखते।


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