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ऐतिहासिक भौतिकवाद

जिस भौतिकवाद का आधार ऐतिहासिक हो उसे ऐतिहासिक भौतिकवाद कहते हैं। इसके अनुसार मनुष्य का सामाजिक जीवन उसकी आर्थिक, राजनीतिक और भौगोलिक परिस्थितियों से निर्धारित होता है, जिनका एक ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य होता है।

इस प्रकार द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद का सामाजिक रूप ही ऐतिहासिक भौतिकवाद है। ऐतिहासिक भौतिकवाद जीवन की भौतिक परिस्थितियों पर बल देता है तथा वह इतिहास को रहस्यात्मक शक्तियों का प्रकाशन नहीं मानता।

ऐतिहासिक भौतिकवाद के अनुसार जीवन-यापन के साधन और उनके उपार्जन की प्रणाली हमारे सम्पूर्ण सामाजिक अस्तित्व का अनुशासन करती है। समाज का इतिहास इसी से निर्मित होता है।

यह सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक व्यवस्थाओं की संरचना को आर्थिक व्यवस्था पर ही आधारित मानता है। इसके अनुसार भौतिक परिस्थितियां और मानव मस्तिष्क दोनों एक दूसरे को प्रभावित करते हैं। यही अन्तःक्रियाएं इतिहास को एक स्वरूप प्रदान करती हैं।


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