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अहिंसा

मन, वचन और कर्म से किसी भी प्रकार की हिंसा न करने को अहिंसा कहा जाता है। संक्षेप में किसी को पीड़ित न करना ही अहिंसा है। यह परम धर्म है।

धर्म तथा दर्शन में यही प्रमुख है जिससे मानव कल्याण सम्भव है। किसी भी जीव के प्रति हिंसा को अनुचित बताया गया है, तथा सबके प्रति अहिंसा के आचरण को ही उचित मार्ग बताया गया।

राजनीति में इसका प्रयोग महात्मा गांधी के सिद्धान्त में हुआ। भारत के स्वतंत्रता आन्दोलन में गांधीवादी अहिंसा आन्दोलन का बड़ा योगदान रहा। महात्मा गांधी का कहना था कि साधन भी अहिंसक होने चाहिए तभी साध्य की श्रेष्ठता है। हिंसा के आधार पर समाज रचना उन्हें स्वीकार्य नहीं था।


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