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अमियरस

भारतीय योग परम्परा में सहस्रदल कमल से निरन्तर झरने वाले रस को अमियरस कहा जाता है। माना जाता है कि यह रस नीचे मूलाधार के निकट पहुंचते-पहुंचते शरीर के अन्य रसों में विलीन हो जाता है।

इसका उद्भव स्थान सहस्रदल कमल के मध्य स्थित चन्द्रबिन्दु है।

इस अमियरस को अमृत, सोमरस, राम रसायन आदि कई नामों से जाना जाता है।

गोरखनाथ ने कहा कि योगी को इस रस को निरन्तर पीना चाहिए तथा इसे पीने के बात जो उन्मत्तावस्था आती है उसी में सदा आनंदित रहना चाहिए। उन्होंने योगी को कहा है कि किसी को वह अपनी इस अवस्था का भेद न बताये।

जो हठयोगी नहीं हैं, जैसे कबीर, वे इस रस को पीने के योग्य बनने के अनेक अन्य तरीके बताते हैं।


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