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अंग्रेजी भाषा के साहित्य को अंग्रेजी साहित्य कहा जाता है। इसे तीन भागों में बांटा गया है - पुरातन अंग्रेजी साहित्य, मध्यकालीन अंग्रेजी साहित्य तथा आधुनिक अंग्रेजी साहित्य।
नौवीं शताब्दी से 11वीं शताब्दी तक के अंग्रेजी साहित्य को पुरातन अंग्रेजी साहित्य, 11वीं शताब्दी से 15वीं शताब्दी के बीच के अंग्रेजी साहित्य को मध्यकालीन अंग्रेजी साहित्य तथा 15वीं शताब्दी से अब तक के अंग्रेजी साहित्य को आधुनिक अंग्रेजी साहित्य कहा जाता है।
पुरानी अंग्रेजी साहित्य में लेखकों और कवियों के रुझान रोचक कहानियों तथा यत्रावृत्तांत में थे। उस युग की रचनाएं बहुतायत में उपलब्ध नहीं हैं परन्तु जो भी उपलब्ध हैं उनसे यही निष्कर्ष निकाला गया है। विडसिथ, द वांडरर, और बिउल्फ उस युग की प्रमुख रचनाएं हैं।
मध्यकालीन अंग्रेजी साहित्य के लेखकों में विलियम लैंगलैंड, जॉन गॉवर (1325-1408) तथा जॉफरी चॉसर (1340-1400) प्रमुख थे। इस युग की प्रतिनिधि रचनाओं में विलियम लैंगलैंड की 'द विजन ऑफ पीपर्स प्लाउमैन' और किसी अज्ञात कवि की रचनाएं 'गावेत एंड दी ग्रीन नाइट' तथा 'दी पर्ल' शामिल हैं।
आधुनिक अंग्रेजी साहित्य का प्रारम्भ जॉफरी चॉसर से ही माना जाता है जिन्हें आधुनिक अंग्रेजी कविता का जनक माना जाता है। पन्द्रहवीं शताब्दी से पश्चिम के देशों में नवजनजागरण युग प्रारम्भ हुआ और विलियम कैक्सटन द्वारा 1440 में छापाखाना की स्थापना करने के बाद पाठ्य सामग्री बहुतायत में छपने लगी। इसके कारण अंग्रेजी साहित्य का तेजी से विकास हु्आ। परन्तु इंगलैंड में नवजागरण काल 1550 के बाद से प्रारम्भ हुआ। प्राचीन साहित्यों के साथ-साथ फ्रांसीसी साहित्य तथा इटैलियन साहित्य की उपलब्धता के कारण उनका अध्ययन अधिक होने लगा जिसका प्रभाव अंग्रेजी साहित्य पर भी पड़ा। इस युग के कवियों में वायट, सरे, एडमंड स्पेंसर (1552-99), सर फिलिप सिडनी आदि प्रमुख थे। एडमंड स्पेंसर की 'द फेयरी क्वीन' अत्यन्त विख्यात हुई।
यही वह काल है जिसमें अंग्रेजी नाटकों का भी काफी विकास हुआ। ग्रीन (1562-92), लिली (1554-1606), टॉमस किड (1557-95), मार्लो (1564-93) तथा विलियम शेक्सपीयर (1564-1616) जैसे महान नाटककार इसी युग में हुए। नवजागरण काल का समापन 1650 के आसपास माना जाता है।
सत्रहवीं शताब्दी में अंग्रेजी साहित्य के रुझान में परिवर्तन आया, विशेषकर शेक्सपीयर के बाद। बेन जॉन्सन (1573-1673) ने कालजयी या क्लासिकल आदर्शों का सहारा लिया और दुखान्त तथा सुखान्त नाटक लिखे। इस युक के साहित्यकारों में थे - वेमेंट, फ्लेचर, चैपमैन (1559-1634), वेब्सटर (1580-1625), शर्ले (1596-1666), टॉमस मिडल्टन (1570-1627) और फिलिप मेसिंजर (1583-1648) आदि।
सन् 1642 से 1660 तक शासक प्यूरिटनों द्वारा इंगलैंड में नाटकों को प्रतिबंधित कर दिया गया था। परन्तु जब 1660 में नाटकों का मंचन पुनः प्रारम्भ हुआ तो उसका नया दुःखान्त स्वरुप उभरा। ऐसे नाटककारों में प्रमुख थे ड्राइडन (1631-1700), ली (1653-92) आदि। परन्तु साथ ही साथ सुखान्त नाटकों में भी प्रगति हुई जिसके लेखकों में प्रमुख थे - इथरिज (1634-91), बाइकरले (1640-1716) तथा कांग्रीव (1670-1729)। इस सदी के कवियों में प्रमुख थे - स्पेंसर, शेक्सपीयर, बेन जॉन्सन, जॉन डन (1572-1631), जॉन मिल्टन आदि। अन्य प्रमुख लेखकों में टॉमस ब्राउन (1605-82) तथा जेरेमी टेलर (1613-67) भी शामिल थे।
अट्ठारहवीं सदी में नव-क्लासिकल युग आया। रचनाएं नियमों के आधार पर की जाने लगीं। इस युग के साहित्यकारों में अलेक्जेंडर पोप (1688-1744), एडिसन (1672-1719), स्टीले (1672-1729), गोल्डस्मिथ (1730-74) जैसे लोग हुए। इसी सदी से अंग्रेजी उपन्यास का प्रारम्भ हुआ जिसका श्रेय पांच लेखकों - फील्डिंग (1707-54), रिचर्डसन (1689-1761), स्मॉलेट (1721-70), स्टर्न (1713-68) तथा गोल्डस्मिथ को दिया जाता है। इस सदी के अन्त तक परिवर्तन होने लगा था जिसके अग्रणी लेखकों में थे - टॉमस ग्रे (1716-71), कॉलिन्स (1721-59), बर्न्स (1751-96), ब्लेक (1757-1827) आदि।
उन्नीसवीं सदी के प्रारम्भ से ही रचनाएं नियमों के बंधन से मुक्त होने लगीं विशेषकर कविता में, जिसने रुमानी स्वरुप ग्रहण किया। ऐसे कवियों में प्रमुख रहे विलियम वर्ड्सवर्थ (1770-1850), कोलरिज (1772-1834), स्कॉट (1771-1832), शेली (1792-1822), कीट्स (1795-1821), बायरन (1888-1824) आदि।
सन् 1830 के बाद से ही नये युग का सूत्रपात हुआ जो उन्नीसवीं सदी के अंत तक चला। यह विक्टोरियन युग था। इसकी विशेषता इसके संतुलित लेखन में दिखायी देती है।
परन्तु बीसवीं शताब्दी में अंग्रेजी साहित्य विविधताओं से भर गया। अनेक प्रकार के साहित्यकारों ने अनेक प्रकार से लिखना प्रारम्भ किया जो आज भी जारी है। इन्हें किस श्रेणी में रखा जाये इसपर आलोचकों में मतभेद है इसलिए बोलचाल की भाषा में इसे आधुनिक साहित्य कहा जाता है। परन्तु इस आधुनिक साहित्य से भी आगे उत्तर आधुनिक साहित्य की बात कही जा रही है जिसका प्रारम्भ 1970 की दशक से माना जा रहा है। इस काल की रचनाओं का सर्वमान्य वर्गीकरण अभी होना है।

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