Loading...
 
जीवधारी शरीर में से जब जीव निकल जाता है तथा पार्थिव शरीर शेष रह जाता है तो उसे मरना कहते हैं। इसी मरने से मुक्ति को अमर होना या अमरता कहते हैं।
यह शरीर जीव धारी है, और यह जब जीव का त्याग करता है तो उसे प्राण त्याग कहते हैं। परन्तु यह परिकल्पना उस परिकल्पना के विपरीत है जिसमें कहा जाता है कि शरीर जीव को धारण नहीं करता बल्कि जीव ही शरीर को धारण करता है। चाहे जो हो, शरीर को जीवधारी मानने तथा जीव को शरीरधारी मानने वाले दोनों तरह के लोग मरने से मुक्त होना चाहते रहे हैं, अर्थात् अमरता प्राप्त करना चाहते रहे हैं। इस दिशा में मानव निरन्तर काम कर रहा है।
जो लोग मानते हैं कि आत्मा जन्म लेता है और मरता है, वे शरीर को अनन्त काल तक ठीक रखकर अमरता हासिल करना चाहते हैं, जो अब तक संभव नहीं हो सका है।
जो लोग मानते हैं कि आत्मा पहले से ही अमर है, उसके मरने का प्रश्न ही नहीं, इसलिए अमरता की यह खोज बेकार है। यह आत्मा शरीर बदलती रहती है। सिर्फ शरीर का नाश होता है, आत्मा का नहीं। ऐसे लोग आध्यात्म की दिशा में बढ़ते हैं तथा इस आत्मा का ज्ञान प्राप्त कर मोक्ष प्राप्त करना चाहते हैं। उनका कहना है कि दुःख-सुख आदि का अनुभव इसलिए होता है कि हमने आत्म-साक्षात्कार नहीं किया है।
Contributors to this page: hindi .
Page last modified on Sunday December 16, 2012 05:37:41 UTC by hindi.

SPECIAL OFFER

Get Your Website Today
Register or transfer domain and get free webmail without hosting. Assisted migration and all types of hosting services available at affordable prices with free trials. You must try this service if you are not happy with your present hosting provider.